आपको बता दे कि देश का सबसे बड़ा स्वर्ण भंडार बिहार में है. केंद्र सरकार द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार बिहार में जमुई जिले के ललमटिया व करमटिया इलाके में पूरे भारत का 44 प्रतिशत स्वर्ण भंडार स्तिथ है. हम आपको बता दे कि देश को इस बात की जानकारी हाल में ही केंद्रीय कोयला एवं खनन मंत्री प्रह्लाद जोशी ने संसद में दी थी.मंत्री जी के इस बयान के बादसे ही यह साफ हो गया कि अगर सभी परिस्थितिया सामान्य रही तो जिन इलाकों में नक्सलियों की बंदूकें बारूद उगलती थीं, वहां की धरती अब शीघ्र ही सोना उगलेगी. ध्यान देने योग्य बात यह है कि इस इलाके की लाल बंजर मिट्टी के नीचे इतना बड़ा सोने का भंडार दबा पड़ा है. सभी को यह जानकारी किसी वैज्ञानिक के द्वारा नही बल्कि चींटियों के द्वारा प्राप्त हुई वही एक और बात हम आपको बता दे की इसका पूरा पता लगाने में सभी को 40 साल लग गए और अब जाकर सरकार ने इसकी पुष्टि की है कि यहां देश का सबसे बड़ा सोने का भंडार है.
गौरतलब है की जब मीडिया ने इस बात का पता लगाना शुरू किया कि आखिर इतने बड़े भंडार का पता लगाया कैसे गया तो स्थानीय लोगों ने जो बताया वह काफी चौंकाने वाला था. इन स्थानीय निवासियों के अनुसार पहली बार चीटियों ने यहां सोने का भंडार होने का संकेत दिया था. ऐसा बताया जाता है कि करीब चार दशक से पहले ही एक बड़े बरगद पेड़ के नीचे चरवाहे धूप से बचाव के लिए जमा हुआ करते थे. इसी दौरान चीटियां खुद का घरौंदा तैयार कर रही थीं तो उस बरगद के पेड़ के आसपास चमकीले कण जमा कर रही थीं. वही पर इसी क्रम में कुछ लोगों की दृष्टि उन चींटियों पर पड़ी और मिट्टी के कण की पीली चमक पर चर्चा शुरू हो गई और तभी से यहबात धीरे-धीरे फैलने लगी और अंततः यह बात प्रशासन तक पहुंची. फिर पुरातत्व व खनन विभाग तक जा पहुंची. इसके बाद तो जो हुआ वह हम सभी जान ही रहे है.
गौरतलब है की यह बात भी सत्य है कि स्थानीय स्तर पर जितने लोगो से आप बात करेंगे आपको उतनी तरह की बातें सुनने को मिलेगी. हम आपको बता दे की पहली बार संसद में सरकार ने भी माना कि जमुई में अकूत स्वर्ण भंडार है और देश का 44 प्रतिशत सोना प्रखंड अंतर्गत करमटिया गांव में है. इसके बाद तो स्थानीय स्तर पर करमटिया को अब सोनमटिया कहा जाने लगा है. हम आपको बता दे कि सरकार को ऐसा अनुमान है की यहाँ तकरीबन 223 मिलियन टन स्वर्ण भंडार है.
आपको बताते चले की सबसे पहले 1982 से लेकर 1986 तक प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित कर जीएसआई की टीम द्वारा यहां खुदाई की जाती रही, लेकिन उस वक्त सरकार द्वारा खर्च के अनुपात में स्वर्ण धातु की उपलब्धता नहीं होने की बात सरकार द्वारा कही गई थी.