कर्मसंन्यासयोग ~ अध्याय पाँच

अथ पंचमोऽध्यायः- कर्मसंन्यासयोग ज्ञानयोग और कर्मयोग की एकता, सांख्य पर का विवरण और कर्मयोग की वरीयता अर्जुन उवाच सन्न्यासं कर्मणां

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ज्ञानकर्मसंन्यासयोग – अध्याय चार

अथ चतुर्थोऽध्यायः- ज्ञानकर्मसंन्यासयोग योग परंपरा, भगवान के जन्म कर्म की दिव्यता, भक्त लक्षण भगवत्स्वरूप श्री भगवानुवाच इमं विवस्वते योगं प्रोक्तवानहमव्ययम्‌

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कर्मयोग~ भगवत गीता ~ अध्याय तीन – Karmyog

यज्ञार्थात्कर्मणोऽन्यत्र लोकोऽयं कर्मबंधनः । तदर्थं कर्म कौन्तेय मुक्तसंगः समाचर ॥ yajñārthātkarmaṇō.nyatra lōkō.yaṅ karmabandhanaḥ. tadarthaṅ karma kauntēya muktasaṅgaḥ samācara৷৷3.9৷৷ भावार्थ : यज्ञ

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सांख्ययोग ~ भगवत गीता ~ द्वितीय दो – Bhagwat Geeta Chapter 2

अथ द्वितीयोऽध्यायः ~ सांख्ययोग संजय उवाच तं तथा कृपयाविष्टमश्रुपूर्णाकुलेक्षणम्‌ । विषीदन्तमिदं वाक्यमुवाच मधुसूदनः ॥2.1॥ sañjaya uvāca taṅ tathā kṛpayā.viṣṭamaśrupūrṇākulēkṣaṇam. viṣīdantamidaṅ

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अर्जुनविषादयोग ~ भगवत गीता ~ अध्याय एक – Bhagwat Geeta Chapter 1

अथ प्रथमोऽध्यायः- अर्जुनविषादयोग दोनों सेनाओं के प्रधान शूरवीरों और अन्य महान वीरों का वर्णन धृतराष्ट्र उवाच धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः

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