गर्भ में पल रहे बच्चे ने मारी इतनी जोर से किक की कोख फट गई,फिर जो हुआ जानकर रह जाओगे दंग …

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गर्भ में पल रहे बच्चे का किक मारना अमूमन एक नार्मल प्रक्रिया होती है

किसी भी महिला के लिए मां बनना एक सुखद अहसास है लेकिन उसके साथ ही चुनौतीपूर्ण भी। नौ माह का समय प्रतिदिन उसे नए-नए अहसास करवाता रहता है जैसे-जैसे गर्भ में पल रहा भ्रूण आकार लेने लगता वैसे-वैसे मां बनने का अहसास और तेज होने लगता है। कहते हैं कि जब बच्चा गर्भ में होता है तो वो पेट के अंदर ही पैर मारता है जिसे बच्चे की किक भी कहा जाता है। इसका अनुभव हर गर्भवती महिला करती है।

आमतौर पर बच्चा दिन में 15-20 बार किक मारता है। ये प्रक्रिया तब शुरू होती है जब धीरे धीरे गर्भाशय में बच्चा आकार लेने लगता है और 6 से 9 महीने के बीच अक्सर एक होने वाली माँ को अंदर चल रहे बच्चे की मूवमेंट का एहसास होता है।

आज से पहले आपने शायद ही कभी सुना हो की किसी बच्चे ने माँ की कोख में ही इतनी तेज लात मार दी हो की कोख ही फट गया हो।

जी हाँ चीन के बीजिंग में एक जेंग नाम की महिला को उस वक़्त दर्द और तकलीफ से गुजरना पड़ा जब प्रेग्नेंसी के आखिरी महीने में उसके अंदर पल रहे बच्चे ने इतनी तेज लात मारी की उसका कोख फट गया। पहले तो जेंग को अंदाजा भी नहीं हुआ की ऐसा कुछ हुआ होगा, उस अचानक से पेट में असहनीय दर्द का एहसास हुआ और वो बेहोश होकर गिर पड़ी।

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बच्चे के किक मारने की वजह से पहले तो जेंग को लगा की ये नार्मल है लकिन उसके होश तब उड़ गए जब उसे खतरनाक दर्द और ब्लीडिंग होना शुरू होगया। इसके बाद लगातार जेंग का बीपी डाउन होने लगा और सांस लेने में भी दिक्कत होने लग गयी। जब जेंग को हॉस्पिटल पहुंचाया गया तो वहां डॉक्टर ने बताया की बच्चे ने एब्डोमिनल कैविटी पर जोर से किक मार दी थी। इसके बाद डॉक्टर्स ने जेंग के अंदर से फ़िब्रोइद्स हटाने के लिए सिजेरियन किया लेकिन उससे भी उसे इन्फेक्शन हो गया।

आखिरकार जटिल मेडिकल कंडीशन से गुजरने के बाद अब जाकर जेंग और उसका बच्चा दोनों ही बिलकुल हेल्दी हैं। इस जटिल स्थति से जेंग और उसके बच्चे को बाहर निकालना डॉक्टर्स के लिए ही काफी मुश्किल था लेकिन आज मेडिकल साइंस ने इतनी तरक्की कर ली है की डॉक्टर्स दोनों की जान बचाने में सफल हुए और अब दोनों एक स्वस्थ जिंदगी जी रहे हैं।