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बड़ा खुलासा : वीरभद्र सरकार में बने बीवरेज निगम ने, कांग्रेस नेता को करोड़पति बनाया,जाँच के बाद कई नेता और अधिकारी आ सकते है गिरफ्त में,उडी सबकी नींद।

पूर्व सरकार के कार्यकाल में बने बीवरेज निगम ने कांग्रेस के एक नेता को करोड़पति बना दिया।

खुलासा हुआ है कि इस नेता को शराब की बिकने वाली हर पेटी पर तीस रुपये कमीशन मिलता था, जिससे करोड़ों रुपये की कमाई हुई। निगम में हुए बड़े गड़बड़झाले की जांच शुरू होने से कई नेता व अधिकारी गिरफ्त में आएंगे।

करोड़ों रुपये का नुकसान ङोलने वाले सामान्य उद्योग से संबंधित इस मामले की जांच आबकारी व कराधान विभाग के अधिकारी कर रहे हैं।यह भी खुलासा हुआ है कि पहले शराब तैयार करने के लिए स्प्रिट खरीदने को खुली निविदाएं आमंत्रित की जाती थीं। बीवरेज निगम बनने के बाद स्प्रिट पर आयात शुल्क ढाई रुपये बल्क लीटर से बढ़ाकर साढ़े आठ रुपये कर दिया गया। इससे संसारपुर टैरेस के एक उद्योगपति को फायदा पहुंचा।

सरकारी शराब की बिक्री को खत्म करने के लिए कोटा प्रणाली बंद की गई, जिसका नतीजा यह हुआ कि सामान्य उद्योग निगम को 35 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। नतीजा यह हुआ कि शराब की बिक्री लगातार घटती चली गई। राज्य में दस कंपनियां देशी शराब का उत्पादन करती है।

पिछले एक साल के दौरान निजी शराब कंपनियों से अधिक शराब खरीदी गई। सरकारी शराब से लदे ट्रक एक हफ्ते तक खाली नहीं किए जाते थे जबकि निजी कंपनियों पर मेहरबानी दिखाई जाती रही।

आबकारी व कराधान विभाग ने शुरू की जांच, नेता-अफसरों की उड़ी नींद,पंजाब की सस्ती स्प्रिट न खरीद कर संसारपुर टैरेस के उद्यमी को पहुंचाया लाभ।कोटा प्रणाली बंद करने से सामान्य उद्योग निगम को 35 करोड़ रुपये का नुकसानमहंगा स्प्रिट खरीदा गया1पंजाब से स्प्रिट की सप्लाई 41 रुपये बल्क लीटर की दर से होती थी। सस्ता स्प्रिट छोड़कर 47.50 रुपये बल्क लीटर संसारपुर टैरेस की कंपनी से खरीदना शुरू किया। प्रदेश में केवल यही कंपनी स्प्रिट उत्पादन करती है। अधिकारी इसलिए फंसेंगे, क्योंकि उन्होंने बिना निविदा के स्प्रिट की खरीद की।इसी महीने हुए बंद करने के आदेश।

धर्मशाला में शीतकालीन सत्र के दौरान कैबिनेट की बैठक में बीवरेज निगम को बंद करने का फैसला लिया गया था। साथ ही निगम में गड़बड़ियों की जांच का जिम्मा आबकारी व कराधान विभाग को सौंपा गया था।सामान्य उद्योग निगम को नुकसान पहुंचाया।बीवरेज निगम गठित करने का मकसद था कि सामान्य उद्योग निगम के तहत होने वाले शराब उत्पादन को सीमित किया जाए। देशी शराब का उत्पादन परवाणू व ऊना के मैहतपुर में होता है। दो साल के आंकड़ों को देखा जाए तो दोनों स्थानों पर देशी शराब की बिक्री लगातार घटती चली गई।

परवाणू में 2016 में 17 करोड़ रुपये मूल्य की शराब का उत्पादन हुआ था, लेकिन 2017 में यह केवल 12 करोड़ रह गया। इसी तरह से मैहतपुर में 2016 में 51 करोड़ का उत्पादन हुआ और 2017 में 28 करोड़ तक सिमट गया था। प्रदेश में देशी शराब की बिक्री को सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने 18 फीसद का कोटा निर्धारित किया था, लेकिन कांग्रेस सरकार ने कोटा प्रणाली खत्म कर दी थी।

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