शिक्षकों से जुड़ी बड़ी खबर, शिक्षा मंत्री ने सुरेश भारद्वाज लिया अब ये कड़ा और अच्छा फैसला ।

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पिछली सरकार में जुगाड़ लगाकर प्रदेश के सरकारी स्कूलों की जगह निदेशालय और उप निदेशक कार्यालयों में डेपुटेशन पर तैनात शिक्षकों को स्कूलों में वापस भेजा जाएगा। शिक्षकों की कमी को देखते हुए शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने यह बड़ा फैसला लिया है।

सचिवालय में मीडिया से बातचीत में शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षा विभाग में डेपुटेशन को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। अब बहुत अधिक आवश्यकता पर ही शिक्षक डेपुटेशन पर भेजे जाएंगे। पहले से डेपुटेशन पर नियुक्त शिक्षकों को वापस स्कूलों में भेजा जाएगा।

वर्तमान में राजधानी स्थित उच्च, प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय और सर्व शिक्षा अभियान, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत तीस से अधिक शिक्षक डेपुटेशन पर नियुक्त है। जिलों में स्थित उपनिदेशक कार्यालयों में 70 से ज्यादा शिक्षक डेपुटेशन पर हैं।

राजनीति और अफसरशाही में ऊंची पहुंच रखने वाले कई शिक्षकों ने स्कूलों में जाने की जगह खुद को निदेशालय और उपनिदेशक कार्यालयों में एडजस्ट करवाया हुआ है।अब सरकार बदलने के बाद अपने डेपुटेशन के लिए अन्य शिक्षक जुगत भिड़ाने में जुट गए हैं। डेपुटेशन करवाने के लिए स्थानीय भाजपा नेताओं को साथ कई शिक्षक रोजाना शिक्षा मंत्री के दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं।लेकिन बीजेपी के सत्ता में रहते हुए उन्हें ये लाभ नही मिल पायेगा।

प्रशिक्षण व्यवस्था को करेंगे मजबूत

शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने बताया कि शिक्षकों का डेपुटेशन सिर्फ डाइट और एससीईआरटी में ही होगा। यहां शिक्षकों के प्रशिक्षण की व्यवस्था को पहले से और अधिक मजबूत किया जाएगा।

शिक्षकों को नई तकनीक से अवगत करवाना वक्त की जरूरत है। उन्होंने कहा कि स्कूलों के औचक निरीक्षण पर भी सरकार का जोर रहेगा।इनरोलमेंट बढ़ाने पर रहेगा विशेष फोकस।शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की इनरोलमेंट बढ़ाने पर सरकार का विशेष फोकस रहेगा। चंडीगढ़, दिल्ली, महाराष्ट्र और तेलंगाना में निजी स्कूलों की जगह सरकारी स्कूलों में अब ज्यादा बच्चे आ रहे हैं।नई दिल्ली में बीते दिनों आयोजित बैठक में उन्होंने कई राज्यों के शिक्षा मंत्रियों से इसको लेकर चर्चा की है।

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