हैलो, मैं मोदी बोल रहा हूँ, पीएम मोदी ने बचा ली 4000 से लोगों की जान रच दिया इतिहास ।

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पीएम मोदी ने किया एक फोन और बच गई 7 हजार लोगों की जान, जानिए कैसे..

मोदी सरकार ने देश की दिशा बदलने के लिए कई ऐसे फैसले लिए हैं, जिससे जनता को शुरुआत में थोड़ी बहुत परेशानी उठानी पड़ी है लेकिन अगर उनके फैसलों को लम्बे समय तक रखकर सोचें तो ये देश की पुरानी छवि को बदल देंगी. भारत पहले के मुकाबले विकास के पथ पर तेजी से बढ़ रहा है.

ऐसे में शायद ही कोई जानता होगा कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने एक बार सात हजार लोगों की जान बचाई थी. उन्होंने एक फ़ोन करके दूसरे देश में फसे भारतीयों की जान बचाई थी।मौजूदा खबर अनुसार बता दें कि दो देशों के युद्ध के बीच जब सुऊदी अरब ने 2015 में यमन को अपना निशाना बनाया था उस समय 4800 भारतीय नागरिकों के साथ में 1972 विदेशियों की भी जान बचाई थी.

उनकी सबकी जान केवल पीएम नरेंद्र मोदी की वजह से बच पाई थी. यह बात विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने आसियान के मंच पर इंडिया प्रवासी भारतीय दिवस पर तीन हजार भारतीय से रूबरू होते वक्त आसियान के मंच से कहीं थी. 2015 में सऊदी हमला यमन पर हुआ तो वह बेहद चिंतित थे क्योंकि वहां हजारों की संख्या में भारतीय फंसे हुए थे.

बता दें कि सुषमा स्वराज ने इस किस्से को लोगों से रूबरू होते हुए बताया कि जब यमन पर हमला हुआ तब भारतीयों को बाहर निकालने का कोई रास्ता नज़र नहीं आ रहा था, क्योंकि उस समय फौजे लगातार बमबारी कर रही थे. तब मोदी ने रियाद में शाह को सीधे कॉल किया और भारतीयों को सुरक्षित निकालने में सहयोग मांगा और एक हफ्ते के लिए बमबमारी रोकने का अनुरोध किया. इस पर सऊदी के शाह ने कहा कि भारत का अनुरोध इतना महत्वपूर्ण है कि उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है लेकिन बमबारी पर पूर्ण विराम से असमर्थता जतायी.

सुषमा के अनुसार मोदी के साथ दोस्ती के चलते सऊदी शाह एक हफ्ते तक सुबह नौ बजे से 11 बजे तक बमबारी रोकने पर राजी हो गये. इस मौके का फायदा उठाते हुए उन्होंने यमन प्रशासन से अदन बंदरगाह और सना हवाई अड्डा खोलने का अनुरोध किया ताकि नागरिकों को एक हफ्ते तक रोजाना दो घंटे तक मुस्तैदी से जिबूती पहुंचाया जा सके. यह अभियान करीब 11 दिन तक चला था जो 1 अप्रैल 2015 से शुरू हुआ था.