गली-गली भटककर मांग रहा था भीख, नहलाया गया तो निकला करोड़पति..

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मित्रों हमारे देश में इतनी व्यवस्था होने के बावजूद बेराजगारी है कि खत्म होने का नाम ही नही ले रही है इसके चलते लोग इतने परेशान रहने लगे है कि वह क्या कर रहेे हैै इसका भी भान नही रहता है आपने कई गरीबों को भीख मांगते देखा होगा पर क्या आप उनकी भीख मांगने की मजबूरी से वाकिफ होंगें नही न,

क्योंकि आज के युग में कोई भीख अगर मांगने जाता है तो उसे भीख तो किसी तरह दे दी जाती पर क्या उससे भीख मांगने की वजह पूछता ऐसा कोई नही करता है, आज हम ऐसे ही व्यक्ति के बारे में बताने जा रहे है जो कि रायबरेली के लालगंज में भीख मांगा करता था। ये भिखारी गली-गली खाने की खोज में भटकता रहता था और मानसिक रूप से संतुलन खो बैठा था। जब इस व्यक्ति को नहला-धुलाकर खाना खिलाया गया और बैग चेक किया गया तो उसकी सारी हकीकत सामने आ गई।

बताया जाता है कि व्यक्ति तमिलनाडु का रहने वाला है और जहरखुरानी का शिकार होने के बाद भटकता हुआ रायबरेली के लालगंज पंहुच आया था। मित्रों ये तो पता ही है कि नियति का खेल ऐसा होता है कि कब किसी को राजा बना दे और कब भिखारी इसका किसी को बोध नही हो पाता है।

दरअसल हुआ यह कि रायबरेली के लालगंज भीख मांगते हुये जो व्यक्ति मिला उसे जब नहलाया गया और खाना खिलाने के पश्चात उससे जब पूछ-ताछ की तो उस व्यक्ति के बारे में जो पता चला वह बहुत ही हैरान करने वाला था, पता चला कि भिखारी के वेश में जो व्यक्ति घूम रहा है वह भिखारी नही बल्कि करोड़पति है।

सूचना पर पंहुचे परिवारजन उसे अपने साथ हवाई जहाज से तमिलनाडु ले गये। इस वृद्ध व्यक्ति के बैग को जब चेक किया गया तो उसके पास उसी के नाम की एक करोड़ 6 लाख 92 हजार के फिक्स डिपॉजिट की रसीद मिली, इसके अतरिक्त 5 इंच लंबी तिजोरी की चाबी मिली,

साथ हही उसके पास से मिले आधार कार्ड से उसकी पहचान मुथया नादर पुत्र सोलेमन पता 240 बी नार्थ थेरू, थिदेयूर पुकुली तिरूनेवेली तमिलनाडु 627252 के रूप में हुई। उसके पास मिले कागजों में उसके घर का दूरभाष नम्बर भी था। सूचना देने पर उसे उसके परिजन हावाइजहाज अपने घर ले गये। परिवारजन के द्वारा यह पता चला कि जुलाई में ट्रेन यात्रा के दौरान वह भटक गये थे। तब से उनकी खोज की जा रही थी।आंशका जतायी गई की वह जहरखुरानी का शिकार हो गये थे, स्वामी जी की मदद के लिये पूर परिवार ने उनका आभार व्यक्ति किया और अपने घर उस वृद्ध व्यकित को ले गय। मित्रों ऐसे लोगों को हम लोग मनुष्य कहते है जो कि अपने नही बल्कि दूसरों के लिये जीना पसन्द करते है ऐसा हर व्यक्ति को करना चाहिये ताकि हमारे देश को एक नई पहचान मिल सके।