सोनिया गाँधी का काला सच जान कर खौल उठेगा आपका खून…

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नई दिल्ली: सोनिया गाँधी का नाम तो सभी लोग जानते होंगे सोनिया गाँधी इंदिरा गाँधी की बहु और राजीव गाँधी की पत्नी है वर्तमान में सोनिया गाँधी कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर कार्यरत है सोनिया गाँधी को लेकर समय समय पर कई विवाद होते रहे हैं. आज हम आपको सोनिया गाँधी के बारे में वो सच बताने जा रहे है जिसे जानकर आप चौंक जायेंगे. भारत सरकार एक रिटायर  आईपीएस और आईबी ऑफिसर मल्लई कृष्णधर ने अपने किताब  ओपन सीक्रेट कई बड़े खुलासे किये हैं उनके मुताबिक सोनिया गाँधी ने भारत के लोगों को हमेशा से बेवकूफ बनाया है सोनिया गाँधी के जन्म स्थान से लेकर सोनिया और राजीव एक ही कॉलेज में पढ़ते थे ये साड़ी बाते झूठी है  उनके मुताबिक राजीव गाँधी जिस कॉलेज में पढ़ते थे उस कॉलेज में सोनिया नाम की कोई लड़की थी ही नहीं. बता दे कि मलय कृष्णा धर ने 29 वर्षों तक इंटेलिजेंस ब्यूरो में सेवा दी है.

भारत की खुफ़िया एजेंसी “रॉ”, का गठन सन 1968 में हुआ था.  रॉ ने देशो की सुरक्षा एजेंसिया जैसे अमेरिका की सीआईए, रूस की केजीबी, इसराईल की मोस्साद और फ़्रांस तथा जर्मनी में अपने पेशेगत संपर्क बढाये और एक नेटवर्क खडा़ किया .  इन खुफ़िया एजेंसियों के बीच आतंकवाद, घुसपैठ और चीन के खतरे के बारे में सूचनायें आदान-प्रदान  होती थी.  लेकिन “रॉ” ने कभी भी  इटली की खुफ़िया एजेंसी  किसी प्रकार का कोई गठजोड़ नहीं किया था था क्योंकि रॉ को इटली पर भरोसा नहीं था.

संजय गाँधी के मौत के बाद राजीव गाँधी का सक्रिय राजनीती में प्रवेश हुआ. रॉ की नियमित ब्रीफिंग राजीव गाँधी लेते थे. जबकि राजीव गाँधी सरकार में किसी भी पद पर नहीं थे. राजीव गाँधी चाहते थे की अरुण नेहरु और अरुण सिंह रॉ की बैठक में हिस्सा ले रॉ के अधिकारीयों ने इसका विरोध भी किया था.  क्योंकि राजीव किसी भी अधिकृत पद पर नहीं थे. लेकिन इंदिरा गाँधी के अनुमति के वजह से वो मजबूर थे. राजीव गाँधी रॉ पर दबाव डालते थे की वो इटालियन खुफिया एजेंसी के साथ सहयोग बनाये. राजीव गाँधी नए नए राजनीती में आये थे उन्हें इन सब चीजों का इतना अनुभव नहीं तह इसके पीछे कारण थी सोनिया गाँधी. बाद में रॉ को इटली के साथ गठजोड़ बनाना पड़ा. रॉ और इटली के जासूसों की पहली बैठक की व्यवस्था भी सोनिया गाँधी ने की थी.

सोनिया गाँधी लगातार इटली के जासूसों के संपर्क में थी और उन्हें भारत की सुचनाये प्रदान करती थी. तब तक उन्होंने भारत की नागरिकता नहीं ली थी जबकि उनकी पकड भारत के प्रधान मंत्री के ऑफिस तक थी. पंजाब में जब आतंक वाद अपने चरम पर था तब इंदिरा ने कारो को बुलेटप्रूफ करने को कहा तब तक भारत में कारे बुलेटप्रूफ नहीं होती थी तब इसका भी जिम्मा जर्मन कंपनी को दिया गया था. इस ठेके का विचौलिया सोनिया के बाहें का पति था रॉ को हमेशा शक था की उसे कमिशन मिला था. लेकिन ये बात बाहर नहीं आने पाई. इंदिरा के जीते जी सोनिया गाँधी इटली का प्रभाव दिल्ली ले आई थी.

सन 1986 में एसपीजी को ट्रेनिंग के लिए इटली जाना था उसमे भी सोनिया के बहन अनुष्का  के पति वाल्टर विंसी ने अधिकारिक तौर पर पैसे की मांग की थी. जब रॉ के अधिकारीयों ने ये पैसा स्विस में देने को कहा तो विंसी ने मना कर दिया और कहा की उन्हें ये पैसा  मिलान(इटली)  में चाहिए. अंततः वह भुगतान इटली में भारतीय दूतावास के जरिये किया गया . इस नगद भुगतान के बारे में तत्कालीन कैबिनेट सचिव बी.जी.देशमुख ने अपनी हालिया किताब में उल्लेख किया है, हालांकि वह तथाकथित ट्रेनिंग घोर असफ़ल रही और सारा पैसा लगभग व्यर्थ चला गया.

ये ट्रेनिग बिलकुल व्यर्थ थी इटली के जो अधिकारी ट्रेनिंग दे रहे थे उनका व्यवहार जवानों के प्रति काफी बुरा था उसने जवानों को थप्पड़ भी मारे थे. बाद में राजिव गाँधी ने इस ट्रेनिंग को रुकवा दिया था.

लेकिन वह ट्रेनिंग का ठेका लेने वाले विंसी को तब तक भुगतान किया जा चुका था. राजीव गाँधी की हत्या के बाद तो सोनिया गाँधी पूरी तरह से इटालियन और पश्चिमी सुरक्षाअधिकारियों पर भरोसा करने लगीं थी., खासकर उस वक्त जब राहुल और प्रियंका यूरोप घूमने जाते थे. सन 1985 में जब राजीव सपरिवार फ़्रांस गये थे तब रॉ का एक अधिकारी जो फ़्रेंच बोलना जानता था, उनके साथ भेजा गया था, ताकि फ़्रेंच सुरक्षा अधिकारियों से तालमेल बनाया जा सके । लियोन (फ़्रांस) में उस वक्त एसपीजी अधिकारियों में हड़कम्प मच गया जब पता चला कि राहुल और प्रियंका गुम हो गये हैं. भारतीय सुरक्षा अधिकारियों को विंसी ने बताया कि चिंता की कोई बात नहीं है, दोनों बच्चे जोस वाल्डेमारो के साथ हैं जो कि सोनिया की एक और बहन नादिया के पति हैं. विंसी ने उन्हें यह भी कहा कि वे वाल्डेमारो के साथ स्पेन चले जायेंगे जहाँ स्पेनिश अधिकारी उनकी सुरक्षा संभाल लेंगे.

भारतीय सुरक्षा अधिकारी यह जानकर अचंभित रह गये कि न केवल स्पेनिश बल्कि इटालियन सुरक्षा अधिकारी उनके स्पेन जाने के कार्यक्रम के बारे में पहले से जानते थे. जाहिर है सोनिया गाँधी भारतीय सुरक्षा एजेंसियों पर विश्वास नहीं करती थीं. जिसका एक और सबूत है कि एक बार  जिनेवा स्थित रॉ के अधिकारी को वहाँ के पुलिस कमिश्नर जैक कुन्जी़ ने बताया कि जिनेवा से दो वीआईपी बच्चे इटली सुरक्षित पहुँच चुके हैं, जबकि रॉ अधिकारी को तो इस बारे में कुछ भी  मालूम ही नहीं था. उस स्विस पुलिस कमिश्नर ने रॉ के अधिकारी को  ताना मारते हुए कहा था  कि “तुम्हारे प्रधानमंत्री की पत्नी तुम पर विश्वास नहीं करती और उनके बच्चों की सुरक्षा के लिये इटालियन एजेंसी से सहयोग करती है”. बुरी तरह से अपमानित रॉ के अधिकारी ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों से इसकी शिकायत की, लेकिन कुछ नहीं हुआ .

अंतरराष्ट्रीय खुफ़िया एजेंसियों के बीच ये बात फ़ैल गयी थी की सोनिया गाँधी भारतीय अधिकारियों, भारतीय सुरक्षा और भारतीय दूतावासों पर बिलकुल भरोसा नहीं करती हैं,  और ये सभी हरकत भारत की छवि खराब करने वाली बात थी. राजीव के मौत के बाद सोनिया के विदेशी दौरे के बारे में रॉ से पहले विदेशी एजेंसियों को पता होता था.

आप सोच सकते हैं जब वो भारत की सुरक्षा अजेंसी पर जरा सा भी भरोषा नहीं करती है जब उनके हाथ में सत्ता की बागडोर आ जएगी तब वो क्या करेंगी. हालांकि “मैं भारत की बहू हूँ” और “मेरे खून की अंतिम बूँद भी भारत के काम आयेगी” आदि  बातें  बोलती रहती हैं, लेकिन यह असली सोनिया नहीं है  विश्व के सभी देश सोनिया गाँधी के बारे में जानते है लेकिन हम भारतीय लोग सोनिया के बारे में कितना जानते हैं. लेकिन उनका दिल हमेशा भारत के लिए ही धडकता है !

इंदिरा गाँधी के सरकार  में  चार मंत्रियों (इंदिरा सरकार के कैबिनेट मंत्री) और दो दर्जन सांसद KGB (रूस की जासूसी एजेंसी) के लिए काम करते थे. KGB  इन्हें इसके लिए मोटी रकम देता था.

मलय कृष्ण धर ने उनकी किताब में कुछ जाने माने तथ्य और पब्लिक सिक्रेटों को प्रकाशित किया है. इस किताब में उन्होंने सोनिया गांधी पर आरोप लगाते हुए कहा है कि सोनिया गांधी एक KGB द्वारा भेजी हुई जासूस है. सन् 1985 में रूस ने राहुल गांधी के स्विस बैंक खाते में दो बिलयन यूएस डॉलर जमा किये गए थे जिनको सम्भालने का कार्य सोनिया गांधी करती थी.

कई अखबारों में भी इस खबर का जिक्र हुआ था  की सोनिया गांधी को रूस में  इतनी भारी रकम क्यों दी गयी थी.अगर सोनिया गांधी भारत की प्रधानमंत्री बन जाती तो हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा,वैज्ञानिकता,तकनीकी और व्यपारिक गतिविधियां एक खुली किताब की तरह होते जिसका फायदा रोमन,रूस आदि देशों को फायदा मिलता था. कृष्णधर द्वारा कुछ सबूत सोनिया गांधी को एक रशियन एजेंट घोषित करते है. जवाहरलाल नेहरु के  कार्य काल के समय भी सोनिया को भारी रकम प्राप्त होती थी. उसके बाद इंदिरा गांधी के चहेते राजीव और सोनिया को पाकिस्तानी बैंकर के द्वारा रकम दी जाती थी. बैंकर आघा हसन अबदी जो कि बैंक ऑफ क्रेडिट एंड कॉमर्स में कार्यरत था. यह बैंक अबु धाबी के शेख जैयद के अवैध धन (नशीली दवाओं से कमाई रकम) को वैध करता था. अगर सोनिया गांधी भारत की प्रधानमंत्री बन गई होती तो हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा, सेना, वैज्ञानिकता और टेक्नोलॉजी विकास (BARC, ISRO, DRDO, ICAR, ICAR) और हमारी व्यापारिक गतिविधियां रूस, रोम और अन्य मुस्लिम राष्ट्रों के लिए एक तरह से खुली किताब के समान हो जाती.

सोनिया की लीडरशिप के लिए संभावित खतरों को एक एक कर के शानदार तरीके से दुर्घटनाओं को प्राकृतिक रूप देकर हटा दिया गया, जो कि KGB की विशेषता है.

कैथोलिक्स रविवार को विशेष मानते है और सोनिया गांधी के सभी खतरों को रविवार को ही खत्म कर दिया गया. राजेश पायलट की रोड एक्सीडेंट में रविवार को मौत हो गई. जितेंद्र प्रसाद रविवार को ब्रेन हैमरेज से मारे गए, माधव रविवार के ही दिन प्लेन क्रैश में मारे गए, कमलनाथ जो कि कांग्रेस के बड़े युवा नेता थे वो भी प्लेन क्रैश में बाल बाल बचे थे.

लाल बहादुर शास्त्री की मौत रूस पर ऊँगली उठाती है. संजय गांधी की मौत भी सोनिया गांधी को शक के दायरे में लाती है. संजय गांधी को रूस के कहने पर मारा गया था ताकि राजीव गांधी अगले प्रधानमंत्री हो. जब राजीव गांधी की मौत हो  गयी थी तो बाहरी जासूसी एजेंसियों सोनिया गांधी को राजनीति में उतारा और सोनिया के राजनीती में आने वाले खतरों को एक एक करके समाप्त कर दिया था.जैसे राजेश पायलेट,जितेंद्र प्रसाद आदि महान राजनेताओं की मौत आज भी रहष्य बनी हुई है . ये खुलासा वाकई में चौकाने वाला है .

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