कश्मीर में भारतीय सेना ने दिखाया अपना रौद्र रूप, ठोक डाले 80 आतंकी, घाटी में छाया मौत का सन्नाटा

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श्रीनगर : मोदी सरकार ने कश्मीर मुद्दे को सुलझाने का बीड़ा उठाया हुआ है. आतंकियों और अलगाववादियों के रहते ऐसा करना संभव नहीं. इसी के चलते सेना को कश्मीर से सभी आतंकियों का सफाया करने के आदेश मिले हुए हैं. जम्मू-कश्मीर में सेना ने आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन ‘ऑल आउट’ शुरू कर रखा है. खबर है कि बड़े पैमाने पर चल रहे सेना के इस अभियान को बड़ी कामयाबी मिली है. भारतीय सेना ने 80 बेहद खूंखार आतंकियों को ठोक डाला है.

80 आतंकी गए, 115 बाकी

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इन आतंकियों को मारने में भारतीय सेना को 6 महीने से भी कम वक़्त लगा. सेना ने बताया है कि आतंकियों के गढ़ दक्षिणी कश्मीर में अभी भी 115 आतंकी हैं. इनमें 100 के करीब स्थानीय आतंकी हैं, जबकि 15 पाकिस्तानी आतंकी भी छिपे हुए हैं. इनके मरने की खबर भी जल्द ही आने वाली है.

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गुरुवार देर रात आतंकियों से एनकाउंटर के दौरान 2 जवान शहीद हो गए थे. पंपोर के पास सामबोरा गांव में हुए इस एनकाउंटर में एक आतंकी को ठोका गया, जबकि 2 आतंकी भाग गए. सेना की ओर से बताया गया कि मारे गए आतंकी का नाम बदर था और वह जैश-ए-मोहम्मद का आतंकी था.

भारतीय सेना की विक्टर फोर्ट के जीओसी (जनरल ऑफिसर कमांडिंग) ने मीडिया को जानकारी दी कि सेना ने पिछले 6 महीने में 80 खूंखार आतंकियों को ठोक डाला है. अब सेना दक्षिण कश्मीर में जेहादियों के अंतिम गढ़ को ध्वस्त करने में जुट गयी है. दक्षिण कश्मीर का शोपियां जिला आतंकवादियों का सुरक्षित ठिकाना माना जाता है.

समस्या ये भी है कि यहाँ के स्थानीय निवासियों का भी ब्रेन वाश इस तरह से किया गया है कि वो भारत को अपना दुश्मन मानने लगे हैं और आतंकियों को छिपने का ठिकाना देते हैं. इसी कारण से यहां आतंकियों की गतिविधियां खुलेआम देखी जा सकती हैं. मगर अब सेना अपने दल-बल के साथ यहाँ आ गयी है और अपने कैम्प लगा रही है. इसके अलावा यहाँ सीआरपीएफ की रिजर्व बटालियन की भी तैनाती की गई है.

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कोंग्रेसी बोल रहे अलगाववादियों की भाषा

सेना के उग्र तेवरों को देखकर स्पष्ट है कि जल्द ही दक्षिण कश्मीर से आतंकियों का सफाया हो जाएगा. आतंकियों के मारे जाने और अलगाववाद फैलाने वालों को सलाखों के पीछे पहुंचाने के बाद ही कश्मीर से धारा-370 हटाए जाने का काम शुरू किया जा सकता है. हालांकि देश की सबसे भ्रष्ट और आतंकी समर्थक पार्टी कांग्रेस को पूरी तरह से उखाड़े बिना भी ये काम काफी मुश्किल है.

इसलिए यदि आने वाले चुनावों में कांग्रेस की जीत होती है, तो ये भी कश्मीर समस्या के समाधान में दिक्कतें पैदा करेगी. एक और अहम् काम है न्यायपालिका के शुद्धिकरण का, जब तक कोलेजियम सिस्टम को ख़त्म करके न्यायपालिका में बैठे गद्दारों को बाहर नहीं किया जाता, तब तक वहां से भी मोदी सरकार के मिशन कश्मीर के लिए दिक्कतें पैदा की जाती रहेंगी.