जानिए क्या हुआ था जब  पूरा मक्का मदीना हिला दिया था गुरु नानक देव जी ने।इनके आगे झुका था सर उस दिन  

आध्यात्म

1 मक्का-मदीना में गुरु नानक देव जी का चमत्कार

गुरु नानक देव जी ने अपने जीवनकाल में कई जगह की यात्राएं कीं। एक बार नानक देव जी मक्का नगर में पहुंच गए। उनके साथ कुछ मुस्लिम भी थे। जब वह मक्का पहुंचे तो सूरज अस्त हो रहा था। सभी यात्री काफी थक चुके थे। मक्का में मुस्लिमों का प्रसिद्ध पूज्य स्थान काबा है। गुरु जी रात के समय थकान होने पर काबा की तरफ विराज गए।

2 पैर उधर कर दे जिस तरफ खुदा का घर नहीं

काबा की तरफ पैर देखकर जिओन ने गुस्से में गुरु जी से कहा कि तू कौन काफिर है जो खुदा के घर की तरफ पैर करके सोया हुआ है? इस पर नानक देव जी ने बड़ी ही विनम्रता के साथ कहा, मैं यहां पूरे दिन के सफर से थककर लेटा हूं, मुझे नहीं मालूम की खुदा का घर किधर है तू हमारे पैर पकड़कर उधर कर दे जिस तरफ खुदा का घर नहीं है।

3 काबा ने भी दिशा बदल ली

गुरु जी की यह बात सुनकर जिओन को गुस्सा आ गया और उसने उनके चरणों को घसीटकर दूसरी ओर कर दिया। इसके बाद जब उसने चरणों को छोड़कर देखा तो उसे काबा भी उसी तरफ ही नजर आने लगा। इस तरह उसने जब फिर से चरणों को दूसरी तरफ किया तो फिर काबा उसी और घूमते हुए नजर आया। जिओन ने यह बात हाजी और मुसलमानों को बताई।
4 दिखा अद्भुत चमत्कार

इस चमत्कार को सुनकर वहां काफी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए। इसे देखकर सभी लोग दंग रह गए और गुरु नानक जी के चरणों पर गिर पड़े। उन सभी ने नानक देव जी से माफी मांगी। जब वह वहां से चलने की तैयारी करने लगे तो काबा के पीरों ने गुरु नानक देव जी से विनती करके उनकी एक खड़ाव निशानी के रूप में अपने पास रख ली।
5 जिसका आचरण शुभ वही अच्छा

जब इस घटना के बारे में काबा के मुख्य मौलवी इमाम रुकनदीन को जानकारी हुई तो वह गुरुदेव से मिलने आया और वह उनसे आध्यात्मिक प्रश्न पूछने लगा। वह नानक देव जी से कहने लगा कि मुझे जानकारी मिली है कि आप मुस्लिम नहीं हैं। पूछने लगा कि यहां आप किसलिए आए हैं। गुरुदेव ने कहा कि मैं आप सभी के दर्शनों के लिए यहां आया हूं।

6 जिसका आचरण शुभ वही अच्छा

इस पर रुकनदीन पूछने लगा कि हिन्दू अच्छा है कि मुसलमान, इस पर गुरु जी ने कहा कि जन्म और जाति से कोई बुरा नहीं होता। वही लोग अच्छे हैं जो ‘शुभ आचरण’ के स्वामी हैं। गुरुदेव जी ने कहा कि पैगम्बर उसे कहते हैं जो खुदा का पैगाम मनुष्य तक पहुंचाए। रसूल या नबी खुदा का पैगाम लाए थे।

7 कुरीतियों का विरोध

इसी तरह जब गुरु नानक जी विवाह के बाद समाज में फैली जात-पात, ऊंच-नीच की कुरीतियां दूर करने की ठानी तो वह जनता के बीच निकल पड़े। सबसे पहले गुरु नानक ने दक्षिण-पश्चिमी पंजाब का भ्रमण किया। यात्रा करते हुए वह सैदपुर गांव में पहुंचे तो वहां वह लालू नामक बढ़ई के घर में रुक गए।

8 कुरीतियों का विरोध

आर्थिक रूप से गरीब लालू के घर रुकने की बात पूरे गांव में फैल गई। उसी गांव में ऊंची जाति का एक धनवान व्यक्ति भागो भी रहता था। उसने साधु-संतों के लिए एक भव्य भोज का आयोजन कर रखा था। उसने नानक को भोज के लिए बुलाया लेकिन उन्होंने वहां जाने से इनकार कर दिया।

9 कुरीतियों का विरोध

भागो ने नानक देव जी से अपने घर पर भोज में नहीं आने का कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि मैं ऊंच-नीच में भेदभाव नहीं करता। लालो मेहनत से कमाता है तुम गरीबों, असहायों को सताकर पैसा कमाते हो।

10 कुरीतियों का विरोध

नानक जी ने एक हाथ से लालो की सूखी रोटी और दूसरे हाथ से भागो का पकवान निचोड़ा तो लालो की रोटी से दूध निकला, वहीं भागो की रोटी से खून निकला। यह देखकर सभी भौचक्के रह गए।इसके बाद वह यात्रा करते हुए असम पहुंचे, यहां एक ऊंची जाति का व्यक्ति खाना बना रहा था। नानक जी उसके चौके में चले गए।

11 कुरीतियों का विरोध

यह देख वह व्यक्ति उन पर गुस्सा हो गया और चौके के भ्रष्ट होने की बात कही। यह सुनकर नानकदेव जी ने कहा कि आपका चौका तो पहले से भ्रष्ट है क्योंकि आपके अंदर जो नीची जातियां बसती हैं, आप उसे कैसे पवित्र करोगे। यह सुनकर वह बहुत शर्मिंदा हुआ।