हिन्दुओ को लेकर सोनिया के लिए हुआ ऐसा खुलासा की हर हिन्दू का खून खौल उठेगा.!

आतंकवाद, कोंग्रेस, देश

नई दिल्ली:  ये खुलासा वाकई में चौकाने वाला है दरअसल आज तक आम जन  में यह बात फैलाई जा रही है और सोशल मीडिया पर भी इसका खूब प्रचार किया जा रहा है की कांग्रेस की नीतिया हिन्दू बिरोधी रही है .

इसी बीच कांग्रेस के एक पुराने और कद्दावर नेता ने एक बड़ा खुलासा किया जो कही न कही इस बात को सही साबित करता है . और ये खुलासा किया है भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति और कांग्रेस के बड़े नेता प्रणव मुखर्जी ने अपनी बुक The Coalition Years में किया है .ये खुलासा वाकई में चौकाने वाला हैं.

औरंगजेब, अन्य मुगलों तथा मुस्लिम हमलावरों ने भारत में हिन्दुओं का नरसंहार किया, हिन्दू महिलाओं के साथ बलात्कार किया, मंदिर तोड़े, धर्म का नाश किया ये सब इतिहास में है. आज के दौर में भी हिंदुओं के देश में ही इनके साथ दोयम दर्जे का व्यवहार होता है. कम से कम कांग्रेस की सरकारों ने तो यही कुछ किया है इस देश में. यूपीए की सरकार के दौरान ऐसे कई काम किए गए जो सहिष्णु हिंदुओं को आतंकवादी और बलात्कारी बताने की कोशिश की गई। 
ईसाई मिशनरियों और मुस्लिम कट्टरपंथियों को बढ़ावा देने के लिए हिंदुओं को बार-बार कठघरे में खड़ा किया जाता रहा. सबसे खास यह कि इन कुत्सित कोशिशों की नायिका रहीं हैं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी. इस बात का खुलासा पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की किताब The Coalition Years में भी हुआ है कि सोनिया गांधी के अध्यक्ष रहते कांग्रेस की नीतियां हिंदू विरोधी रही हैं

प्रणब दा ने खुलासा किया है कि किस तरह सोनिया गांधी के नेतृत्व में हिंदुओं को टारगेट कर फंसाया गया है, हालांकि प्रणब दा ने सोनिया गांधी पर सीधा निशाना नहीं साधा है, लेकिन कांग्रेस की नीतियों का तो कच्चा चिट्ठा जरूर खोल दिया है। नवंबर 2004 में कांग्रेस के सत्ता में आने के कुछ महीनों के भीतर ही दिवाली के मौके पर शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती को हत्या के एक केस में गिरफ्तार करवाया गया था, जिस वक्त गिरफ्तारी की गई थी, तब वो 2500 साल से चली आ रही त्रिकाल पूजा की तैयारी कर रहे थे, गिरफ्तारी के बाद उन पर अश्लील सीडी देखने और छेड़खानी जैसे घिनौने आरोप भी लगाए गए थे, 
दरअसल प्रणब मुखर्जी ने अपनी किताब ‘द कोएलिशन इयर्स 1996-2012’ में इस घटना का जिक्र किया है। उन्होंने लिखा है कि “मैं इस गिरफ्तारी से बहुत नाराज था और कैबिनेट की बैठक में मैंने इस मसले को उठाया भी था,मैंने सवाल पूछा कि क्या देश में धर्मनिरपेक्षता का पैमाना सिर्फ हिंदू संत-महात्माओं तक ही सीमित है? क्या किसी राज्य की पुलिस किसी मुस्लिम मौलवी को ईद के मौके पर गिरफ्तार करने की हिम्मत दिखा सकती है?”