अमिताभ बच्चन की जिंदगी से जुड़ी ये 20 बातें फैन भी नहीं जानते

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स्टार ऑफ द मिलेनियम’, हिंदी सिनेमा के सबसे चहेते कलाकार अमिताभ बच्चन, आज अपनी 75वीं सालगिरह मना रहे हैं. अमिताभ उन चंद अभिनेताओं में से हैं जिनकी एक्टिंग की रेंज ने उनके आलोचकों को भी हरदम चौंकाया है. करीब आधी सदी तक हिंदुस्तान ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों में दर्शकों के दिलों पर राज करना आसान नहीं. क्विंट हिंदी इस मौके पर लेकर आया है, अमिताभ की फिल्मों और उनकी जिंदगी से जुड़े 20 ऐसे किस्से जिनके बारे में उनके चाहने वाले भी शायद ही जानते होंगे.. फिल्मी पर्दे पर अमिताभ बच्चन बाद में दिखे. पहले सुनाई दी उनकी आवाज. फिल्म थी- 1969 में आई मृणाल सेन की . अमिताभ फिल्म के सूत्रधार थे.

फिल्म के क्रेडिट्स में उनका नाम अमिताभ बच्चन न होकर अमिताभ ही नजर आता है. फिल्म में वॉइस ओवर के लिए अमिताभ को 300 रुपये का मेहनताना दिया गया. तो एक तरह सिनेमा से पहली कमाई 300 रुपये ही थी.

.फिल्मफेयर-माधुरी मैग्जीन ने 60 के दशक में एक एक्टर कॉन्टेस्ट शुरू किया था. अमिताभ ने भी इसके लिए एक तस्वीर भेजी. तस्वीर में वो एक पेड़ पर हाथ रखे सौम्य मुस्कुराहट बिखेरते दिखाई देते हैं. उन्हें सेलेक्शन राउंड में ही बाहर कर दिया गया. फिल्मफेयर ने उन्हें कभी ठुकराया था लेकिन फिल्मों में आने के बाद अमिताभ को 30 से ज्यादा बार फिल्मफेयर पुरस्कारों के लिए नॉमिनेट किया गया.

.अमिताभ को फिल्म की कहानी पसंद आई या नहीं इसके बारे में टीनू आनंद एक दिलचस्प बात बताते हैं. टीनू के मुताबिक अगर कहानी सुनते वक्त अमिताभ न आसमान की तरफ देखें और न बालों में हाथ फेरें, इसका मतलब उनकी हां है. और अगर वो ऐसा कुछ भी करते हैं तो समझो फिल्म रिजेक्ट.

अमिताभ की पहली नौकरी थी कोलकाता की बर्ड एंड कंपनी में. पहली तनख्वाह थी 500 रुपये और कट कर हाथ में आते थे 460 रुपये.

. फिल्मों में आने से पहले वॉइस-ओवर किया करते थे, एक वॉइस ओवर के लिए उन्हें अक्सर 50 रुपये तक मिल जाया करते थे.

ख्वाजा अहमद अब्बास के लिए अमिताभ को साइन कर रहे थे, तो उन्हें ये नहीं पता था कि वो अमिताभ बच्चन हैं यानी हरिवंश राय बच्चन के बेटे. जैसे ही उन्हें ये बात पता लगी, अब्बास ने कॉन्ट्रेक्ट पर साइन करने से उन्हें रोक दिया. अब्बास ने कहा कि उन्हें अमिताभ के पिता से इजाजत लेनी होगी. और कॉन्ट्रेक्ट की जगह अब्बास ने हरिवंश राय बच्चन को टेलीग्राम किया और उनकी हां के बाद अमिताभ को फिल्म मिली.

फिल्म , अमिताभ को प्राण के कहने पर मिली थी. अमिताभ के नाम की सिफारिश, प्राण से उनके बेटे ने की थी, जिसे फिल्म काफी पसंद आई. इससे पहले की स्क्रिप्ट को धर्मेंद्र, दिलीप कुमार, देव आनंद और राज कुमार ठुकरा चुके थे. हालांकि, के लेखक सलीम-जावेद शुरू से अमिताभ के पक्ष में थे. तब तक अमिताभ की गिनती फ्लॉप हीरो के तौर पर होती थी. ने अमिताभ को एंग्री यंग मैन के तौर पर स्थापित कर दिया.

8. अमिताभ और जया की मुलाकात किसी फिल्म सेट या फिल्मी पार्टी में नहीं हुई थी. दोनों मिले पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट में. जया वहां स्टूडेंट थीं और अमिताभ की शूटिंग के लिए वहां पहुंचे थे.

9. की घटना के बाद जब अमिताभ अस्पताल में भर्ती थे, तो पुनीत इस्सर हिंदी फिल्मों के दर्शकों की नजर में असली खलनायक बन गए. जाहिर है ये एक हादसा था. अमिताभ को जब खून की जरूरत पड़ी तो सबसे आगे रहने वालों में पुनीत की पत्नी थीं.

. अमिताभ की फिल्म ‘’ में खदान धसकने का सीन उनकी निजी जिंदगी से लिया गया है. अमिताभ कोलकाता की बर्ड एंड कंपनी में काम करते वक्त अक्सर खदानों के दौरे पर जाते थे. उसी दौरान एक खदान में नई मशीन की टेस्टिंग के दौरान कुछ मजदूर दब गए. बाद में इस सीन को में उतारा गया.

. फिल्म में जहां अमिताभ और संजीव कुमार का दिल गब्बर के रोल पर आया था तो वहीं धर्मेंद्र ठाकुर का किरदार निभाना चाहते थे. फिल्म के डिस्ट्रीब्यूटर तो ये भी चाहते थे कि फिल्म में अमिताभ की जगह शत्रुघ्न सिन्हा को लिया जाए, क्योंकि अमिताभ के नाम फिल्म की कास्टिंग तय होते वक्त सिर्फ फ्लॉप फिल्में ही थीं. तब तक रिलीज नहीं हुई थी. लेकिन सलीम-जावेद ने रमेश सिप्पी को अमिताभ के लिए राजी कर लिया. वो भी पूरे 1 लाख के मेहनताने पर.

अमिताभ की मशहूर फिल्म की ओरिजिनल कहानी उनकी पत्नी जया बच्चन ने लिखी थी. जिसे बाद में टीनू आनंद के पिता इंदर राज आनंद ने संवारा और उसका स्क्रीनप्ले लिखा.

अमिताभ-जया की फिल्म भारत से ज्यादा श्रीलंका में पसंद की गई. श्रीलंका के एंपायर सिनेमा में फिल्म डेढ़ साल तक लगी रही. ये श्रीलंका के इतिहास में उस वक्त तक की सबसे बड़ी हिट थी.

हरिवंश राय बच्चन ने अमिताभ का नाम पहले रखा. बाद में कवि सुमित्रानंदन पंत के कहने पर नाम बदलकर अमिताभ रखा गया.

राजीव गांधी और अमिताभ बच्चन अच्छे दोस्त थे. तीन साल के अफेयर के बाद राजीव ने सोनिया से शादी करने का मन बनाया. सोनिया 1968 के जनवरी महीने की शुरुआत में और शादी की तारीख थी 25 फरवरी 1968. भारतीय परंपरा के मुताबिक सोनिया, शादी से पहले गांधी परिवार के साथ नहीं रह सकती थीं. अमिताभ ने सुझाव दिया कि सोनिया, उनके घर ही रहें. सोनिया गांधी 45 दिन तक हरिवंशराय बच्चन और तेजी बच्चन के साथ रहीं. सोनिया का कन्यादान भी हरिवंश राय ने किया.

. मुंबई और इलाहाबाद के अलावा अमिताभ ने अगर सबसे ज्यादा वक्त कहीं गुजारा है तो वो है- कोलकाता. अमिताभ काम की तलाश में 1962 में कोलकाता पहुंचे और करीब 8 साल तक यहां रहे.

80 के दशक में कल्याणजी-आनंदजी के निर्देशन में विदेशों में कई कॉन्सर्ट किए जहां अमिताभ, फिल्मों में गाए अपने गानों को स्टेज पर गाते थे

अमिताभ बच्चन दाएं और बाएं, दोनों हाथों से लिख लेते हैं.

19. अमिताभ बच्चन तमाम इंटरव्यू में कह चुके हैं कि वो दिलीप कुमार को अपना आदर्श मानते हैं. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि अमिताभ ने फिल्म ‘गंगा जमुना’ कम से कम 25 बार देखी थी. वो भी कॉलेज बंक करके.

ने लोगों को तो पैसा जीतने का मौका दिया ही, अमिताभ को भी इस शो ने लाइफलाइन दी. अमिताभ की कंपनी एबीसीएल पर करीब 90 करोड़ का कर्ज था. अमिताभ इस शो को शायद ही कभी हाथ लगाते अगर उन्हें कर्ज चुकाने की चिंता न होती.