रोज सुबह करें ये 1 काम, इससे असफल लोगों को भी मिलने लगती है सफलता

Featured, Hinduism, आध्यात्म

कहते हैं सुबह का असर आपके पूरे दिन के काम पर होता है। इसलिए जरुरी है कि आप दिन की शुरुआत इस तरह से करें कि सब कुछ आपके अनुकूल हो जाए। आप जो भी काम करें उसमें आपको सफलता मिलती जाए। इसके लिए आपको कोई खर्च करने की जरुरत नहीं है बस हर दिन सुबह उठकर भगवान श्रीकृष्ण के बताए एक आसान उपाय को ध्यान रखना है। आइए जानते हैं कौन सा है वो उपाय …

कौन सा है वो उपाय…. भगवान श्री कृष्ण गीता में कहते हैं, महर्षयः सप्त पूर्वे चत्वारो मनवस्तथा। मद्भावा मानसा जाता येषां लोक इमाः प्रजाः।।

यानी सप्तर्षि मेरे ही मन से उत्पन्न हुए हैं और मेरी ही विभूति हैं। जो व्यक्ति सुबह उठकर इनके नाम का ध्यान करता है उनका पूरा दिन उत्साह और आनंद में बीतता है।

वेदों का अध्ययन करने पर जिन सात ऋषियों या ऋषि कुल के नामों का पता चलता है वे नाम इस प्रकार है:- 1.वशिष्ठ, 2.विश्वामित्र, 3.कण्व, 4.भारद्वाज, 5.अत्रि, 6.वामदेव और 7.शौनक। कहा जाता है जो सुबह इनके नाम का ध्यान कर लेता है। उसका पूरा दिन अच्छा बीतता है और हर काम में सफलता मिलने लगती हैँ

वशिष्ठ ये राजा दशरथ के कुलगुरु थे और दशरथ के चारों पुत्रों के गुरु थे। वशिष्ठ के कहने पर दशरथ ने अपने चारों पुत्रों को ऋषि विश्वामित्र के साथ आश्रम में राक्षसों का वध करने भेज दिया था। उन्हीं के कुल के मैत्रावरूण वशिष्ठ ने सरस्वती नदी के किनारे सौ सूक्त एक साथ रचकर नया इतिहास बनाया।

विश्वामित्र ऋषि होने के पहले विश्वामित्र राजा थे और ऋषि वशिष्ठ से कामधेनु गाय को हड़पने के लिए उन्होंने युद्ध किया था, लेकिन वे हार गए। इस हार ने ही उन्हें घोर तपस्या के लिए प्रेरित किया। उन्होंने इतने लंबे समय तक तप किया था कि देवताओं को उनका तप भंग करने की कोशिश करनी पड़ी।

कण्व माना जाता है इस देश के सबसे महत्वपूर्ण यज्ञ सोमयज्ञ को कण्वों ने व्यवस्थित किया। कण्व वैदिक काल के ऋषि थे। इन्हीं के आश्रम में हस्तिनापुर के राजा दुष्यंत की पत्नी शकुंतला और उनके पुत्र भरत का पालन-पोषण हुआ था।

भारद्वाज भारद्वाज ऋषि राम काल के पहले हुए थे, लेकिन एक उल्लेख अनुसार वनवास के समय श्रीराम इनके आश्रम में गए थे, जो ऐतिहासिक दृष्टि से त्रेता-द्वापर का संधिकाल था।

अत्रि ऋग्वेद के पंचम मण्डल रचने वाले महर्षि अत्रि ब्रह्मा के पुत्र, सोम के पिता और कर्दम प्रजापति व देवहूति की पुत्री अनुसूया के पति थे।

वामदेव वामदेव ने इस देश को सामगान (यानी संगीत) दिया। वामदेव ऋग्वेद के चतुर्थ मंडल के सूक्त रचने वाले और जन्मत्रयी के तत्ववेत्ता माने जाते हैं।

शौनक शौनक ने दस हजार विद्यार्थियों के गुरुकुल को चलाकर कुलपति का विलक्षण सम्मान हासिल किया उस समय वो ऐसा करने वाले पहले ऋषि थे।