इन नियमों का पालन कर लें, बीमारी आपके पास नहीं आयेगी

हमेशा खाना खाएं तो चबा चबाकर खाये. ओतना चबाएं जितने आपके दांत है दांत अगर 32 हैं तो 32 बार चबाएं.

खाना जब भी खाएं तो जमीन पर बैठ कर खाएं. जमीन पर बैठने से पृथ्वी का गुरुत्व बल हमारी पृथ्वी पर केन्द्रित है पेट की नाभि पर गुरुत्वाकर्षण होने से नाभि चार्ज है नाभि के पास जठर है वो चार्ज है जठर के चार्ज होने से अग्नि चार्ज है अग्नि तीर्व होने से खाना जल्दी पचेगा इसलिए बैठ कर खाएं.

दोपहर को जब आप भोजन करें तो आराम जरुर करें. कम से कम 48 मिनट क्योंकि दोपहर का भोजन खाते ही हमारे शरीर का ब्लड प्रेशर बढ़ता है. एक तो सूरज की धुप होती है दोपहर को और दूसरा अंदर की गर्मी दोनों मिलकर ब्लड प्रेशर बढ़ता है, बी.पी. बढेगा तो आराम ही करना पड़ेगा. सबसे अच्छी मुद्रा होती है लेफ्ट साइड में लेटना.

ज्यादा नही लेटना फिर मोटापा आता है, 48 मिनट तक लेटना अच्छा है उसमें नींद आ जाये तो ले लेना ज्यादा लेटेंगे तो फिर मोटापा आता है इसलिए इसका ध्यान रखना.

इसके आगे का आठवां नियम है कि रात का खाना खाने के दो घंटे तक आराम न करें. 2 घंटे बाद ही करना. रात के खाने के बाद पैदल चलना जरुरी है 1000 कदम, उसके बाद कुछ और काम करके फिर आराम करना. क्युंकी रात को ब्लड प्रेशर कम होता है. और कम ब्लड प्रेशर में आराम करना खतरनाक है, ऊँचे ब्लड प्रेशर या हाई बी.पी में काम करना खतरनाक है.

इसके बाद का नियम है आप जब भी खाना खाएं दो बातों का ध्यान रखें. दो चीजें ऐसी न खाएं जो एक दुसरे के विरुद्ध है. ठंडा गर्म एक साथ न खाएं, दूध और दही एक साथ न खाएं. उड़द की डाल और दही एक साथ न खाएं. खट्टे फल और दूध एक साथ न लें. कटहल की सब्जी के साथ दूध न लें. कच्ची प्याज खा रहे है तो दूध न लें. दही में नमक डाल कर न खाएं. हमेशा दही में मीठी चीजें डाल कर खाएं.

आपको अजीब सा लगेगा कि ये क्या बोल रहे है क्योंकि रायता तो बिना नमक के बनता नही. बात ये है कि जो दही है वो जीवाणुओं का घर है. अगर आप लेंस लगाकर देखेंगे तो दही में लाखों जीवाणु हैं और शरीर को ये जीवाणु जीवित चाहिए. आप दही में एक चुटकी नमक डालेंगे तो सब जीवाणु मर जायेंगे. अब जीवाणु मर गये तो दही खाया जो वो बेकार, इसलिए जीवित जीवाणु दही के साथ जरुरी हैं. तो कहा गया है कि दही के साथ नमक न खाएं. या दही में बुरा डालो, खांड डालें, या गुड़ डालें तो बुरा , खांड या गुड़ से जीवाणुओं की संख्या बहुत बढ़ जाती है. और बड़ी हुयी संख्या के जीवाणु आपको चाहिए.

माताओं के लिए एक नियम है घर में खाना बनाते समय ऐसे बर्तन कभी भी इस्तेमाल न करें जो चारों तरफ से बंद हो. हमेशा खाना बनाने वाला बर्तन खुला हो. आधा खुला आधा बंद हो तो भी नही चलेगा. पूरा बंद न हो क्यूंकि बाहर की हवा खाना बनाते समय अंदर प्रवेश करनी जरुरी है. वागभट्ट जी ने कहा है कि भोजन बनाते समय सूर्य का प्रकाश या पवन का स्पर्श दोनों में से एक जरुरी है. अब ये तभी संभव है जब बर्तन खुला हो. वागभट्ट जी के अनुसार प्रेशर कुकर में खाना न बनाएं. अब प्रेशर कुकर वागभट्ट जी के ज़माने में नही था. लेकिन उनको शायद ये अंदाजा जरुर था कि मानव कभी न कभी ये जरुर बना लेगा. ये बहुत ही गंभीर बात है.

आप जानते हैं कि प्रेशर कुकर एल्युमीनियम का है. और एल्युमीनियम दुनिया का सबसे ख़राब मेटल है, खाना बनाने के लिए और खाना पकाने के लिए भी. एक सर्वे के अनुसार पाया गया कि गरीबों को अस्थमा, टी.बी. क्यूँ होता है उस सर्वे का रिजल्ट आया कि सारे गरीब लोग एल्युमीनियम के बर्तन में खाना खाते और पकाते है यही उनके दाम और अस्थमा का कारण है.

सब लिख पाना असंभव है ये विडियो देखिये >>

The post इन नियमों का पालन कर लें, बीमारी आपके पास नहीं आयेगी appeared first on Rajiv Dixit | Rajiv Dixit Audio | Rajiv Dixit Video | Rajiv Dixit Lecture | Rajiv Dixit Health.