बौद्ध और ब्राह्मण लोगों का एक है धर्म, फिर क्यों करते है जातिवाद

विभिन्न संस्कृति के देश में एक ऐसी परंपरा चलती आ रही है जो दीमक की तरह भारत में लगी है. हा सही समझे आप! जातिवाद ऐसा दीमक है जो बरसो से भारत को लगा है. इसका फायदा कोई आगे बढने के लिए करता है तो कोई राजनीती करने के लिए.

लेकिन आप को बता दे की यह धर्म को लेकर और फिर जाति को लेकर इतना विवाद क्यों करते है लोग. जब सभी के शरीर में खून लाल है और ५ तत्वों से बने है.

धर्म कोई भी हो, सभी धर्मो के बड़ी जाति वाले अपने से कम जाति के लोगों के साथ कोई रिश्ता नहीं जोड़ते. ख़ास करके हम बात करेंगे हिन्दुओ की, क्योंकि हम सब हिंदुस्तान में रहते है.

विदेशी लोग जब विश्व के धर्मो के बारे में पढ़ते है तब उनके सूची में हिंदु धर्म सब से आखिर में होता है. जबकि बुद्धिज़म ऊपर होता है.

ऐसा क्यों?

सवाल करने से पहले आपको गौतम बुद्ध के बारे में जानकारी होनी आवश्यक है. तब आप ऐसा सवाल कभी नहीं करेंगे.

बौद्ध धर्म कैसे निर्माण हुआ?

आप को तो पता ही होगा कि, सिद्धार्थ का जन्म एक क्षत्रीय परिवार हुआ था और वह हिंदु था.

जैसे जैसे  सिद्धार्थ बड़े होते गए तो उनके आस पास की चीजो को देखकर उनके मन में अनेको सवाल पैदा होने लगे, फिर सिद्धार्थ को उन सवालो का जबाव भी चाहिए था. परंतु उन्हें दूर दूर तक उन सवालो के जबाव नजर नहीं आते थे. उसे आने वाले सवाले के जवाब नहीं मिले. एक बड़े साम्राज्य में पला बड़ा ये युवक अपने सवालों के जवाब खोजने के लिए जंगल की धुल उडाता घूम रहा था. कई महीनो बीत गए पर जवाब नहीं मिला. तब सिद्धार्थ ने ठान लिया की अगर उसे वो ज्ञान नहीं मिला तो वो कभी ध्यान नहीं  से उठेगा. आखिर कार सिद्धार्थ को बिहार के बोध गया में एक वट वृक्ष के निचे वो परम ज्ञान मिल गया और सिद्धार्थ गौतम बुद्ध बन गये.

एक हिंदु क्षत्रीय होने के बावजूद उन्हों ने अपना धर्म छोड़ा और लोगों के लिए एक नया धर्म बौद्ध दिया. इसी धर्म के लोग अब विश्व में हिन्दुओं से ज्यादा हो गए है. हिंदु धर्म को फ़िल्टर करके निकला है बौद्ध धर्म को जिसे धर्मो में सबसे श्रेष्ठ कहा जाता है.

हिंदु धर्म कैसे निर्माण हुआ?

दंत कथाओं को पढ़ते हुए, हिंदु धर्म सब से पुराना माना जाता है. किंतु धर्म में अभी जितना जातीवाद होता था उतना तब नहीं होता था. पहले जाति कर्म के आधार पर हुआ करती थी और पूर्वजो के आधार पर. अभी के जमाने में जाति के नाम पर आतंक देखने को नहीं मिलता था.

कई वर्ष पहले भारत विशाल देश था जहा पर अनेक देशो के लोग आये और राज करके चले गए. हड़प्पा और मोहन जोदडो और नोमेडिक सभ्यता के वक़्त से हम बात कर रहे है. लोग आते गए और स्थानिक लोगों के साथ काले और गोरे का भेद भाव शुरू हो गया. गोरे खुद को प्रिस्ट (ब्रामण) और बड़े जाति के कहलाने लगे. यही लोग अपने सहूलियत देख कर आगे धर्म में परंपराए एवं रूढ़ीवाद का विस्तार करते रहे. यही परंपरा अभी तक जारी है बस बदलते ज़माने के साथ इन में थोड़े बदलाव आए है.

बौद्ध और ब्राह्मण लोगों का एक कैसे ?

अब दोनों धर्मो के बारे में हमे थोडा ज्ञान तो हो चुका है. अब आपको थोडा तार्किक होना पड़ेगा.

हिन्दुओ में सबसे बड़ी जाति है ब्राह्मण और जो नीचली जात है वो दलित. किंतु अब यह दलित लोग बौद्ध धर्म को अपना रहे है.

बौद्ध धर्म में जो कुछ कहा गया है वो अधिक श्रेष्ठ  विचार है जिसके सामने ब्राह्मण भी समान है. गौतम बुद्ध को यह जातिवाद पसंद नहीं था इस लिए उन्होंने इंसानों के साथ जानवरों के बारे में सोच कर एक चलने की राह दी. इस राह पर जो भी लोग चलते गए उन्हें जीवन में सकारत्मक और व्यावहारिक दुष्टि मिली.

यही वजह है, जीने के तरीके में जिसे लोग धर्म कहते है और इस धर्म में भेद भाव नहीं बल्की सब समान है.