कैसे एक 250 टन का पत्थर बिना सपोर्ट के टिका है ढलान पर? आइये जाने इसका राज़!!

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हमारी ये दुनिया एक दम अनोखी है, यहाँ आय दिन एक न एक अजूबा देखने को मिलता रहता है। इस दुनिया में ऐसे कारनामे दिखते रहते हैं जिन्हें देख कर सब हैरान रह जाएं। कुछ तो लोगों की सोच से भी परे है। तो दोस्तों आज हम आपको बताते ऐसे ही एक हैरान कर देने वाले रहसय के बारे में। जिसे सुनने के बाद आप खुद सोचेंगे कि आखिर ऐसा हो कैसे सकता है।

जैसा कि हम सब जानते हैं कि भारत अलग अलग भाग में विभाजित है। जिसका एक भाग दक्षिण भारत है। महाबलीपुरम भी एक दक्षिण भारत का एक शहर है जिसे मामल्लपुरम भी कहा जाता है। तमिलनाडु का यह बहुत पुराना नगर है। दोस्तों आपको बता दें कि महाबलीपुरम में कहीं ऐसे पुराने स्थान हैं जो भारतीयों के साथ-साथ विदेशी पर्यटकों को बेहद पसंद आते हैं। इनमें से एक प्राचीन विशाल पत्थर है जो कि यह का आकर्षण केंद्र बना रहता है।

दोस्तों यह पत्थर लगभग 1200 साल पुराना है और इसे श्री कृष्ण की माखन गेंद भी कहा जाता है। महाबलीपुरम का यह विशाल पत्थर लगभग 20 फिट ऊंचा है और इस पत्थर की खास बात यह है कि यह पत्थर ढलान पर भी स्तिर खड़ा रहता है ना ही हिलता है और न ही लुढ़कता है। दोस्तों यह पत्थर 250 टन के होने के बावजूद स्तिर खड़ा रहता है।

लोगों का मानना है कि उस भूमि पर श्रीकृष्ण ने थोड़ा सा माखन गिरा दिया था जो अब ये पत्थर बन चुका है। इसी कारण से इसे श्री कृष्ण की माखन की गेंद भी कहा जाता है। मगर अभी तक ये पता नहीं चल पाया है कि इसे किसी इंसान ने खड़ा किया है प्रकृति ने। यह स्मारक सभी लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करती है।

महाबलीपुरम में सभी स्मारकों को चार भाग में विभाजित किया गया है। इन विभाजनों का नाम है श्निया रथ मंडप, गुफा मंदिर, संकनात्मक मंदिर और रॉक। यह सभी स्मारक महाबलीपुरम स्मारकों के नाम से जाने जाते हैं। इन स्मारकों में प्राचीनकाल के वास्तुकला को देख जाता है। दोस्तों आपको बता दें कि महाबलीपुरम चेन्नई से केवल 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। महाबलीपुरम जाने के लिए पहले आप चेन्नई तक रेल या हवाईमार्ग से जा सकते है। उससे आगे महाबलीपुरम तक आप बस से जा सकते हैं।