सालों बाद मिल ही गई आखिर रामायण की सीता, अब देखोगे तो पहचान भी नहीं पाओगे

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शायद ही किसी को याद नही होगा आज से कुछ समय पहले रविवार का अलग ही महत्व होता था. जब सभी लोग रविवार को आने वाली रामायण का इंतजार करते थे,बचपन में आपने भी शायद इस रविवार का आंड जरुर लिया होगा उस समय सभी लोग अपने परिवार के साथ बैठकर रामायण का लुत्फ जरूर उठाते थे.

और यदि रामायण देखते समय बिजली चली जाए तो जल्दी बिजली आने की सभी प्रार्थना करते थे और यदि बिजली नही आती थी तो बिजली विभाग को भला बुरा कहते थे.रामायण के कुछ किरदार तो हम कभी नही भूल सकते है,उनको देखकर ही भगवान की छवि नजर आती है.

जैसे रामायण के मुख्य चरित्र अरुण गोविल को देखते ही श्री राम की छवि साफ दिखाई देती है, माँ सीता की याद आते ही रामायण की माँ सीता दिखाई देती है. रामायण का पूरे भारत मे एक अलग महत्व था,रामायण के पात्रों को लोग वास्तविक पात्र मानने लगे थे.

इस टीवी प्रोग्राम का इतना महत्व था कि रविवार के दिन सड़को पर सन्नाटा हो जाया करता था. आप सभी ने रामायण देखी होगी और उसके सभी पात्रों के बारे में भी अच्छे जानते होंगे. रामायण में माँ सीता का किरदार निभाने वाली दीपिका चिखलिया का चेहरा आपको जरूर याद होगा.लेकिन क्या आपने दोबारा कभी कोशिश करी कि आपकी चहेती कलाकार कहाँ है और कैसी नजर आती होंगी, क्या कर रही होंगी?

अब आपके मन मे भी ये सवाल उठ रहा होगा कि इन सब सवालों के जवाब जाने,तो आइए आपको हम बताते है उनके बारे में. रामायण के बाद उन्होंने कई फिल्मों में काम किया लेकिन फिल्मी दुनिया मे उन्हें सफलता नही मिली.

दीपिका छिखलिया (जन्म २९ अप्रैल १९६५) भारतीय अभिनेत्री हैं जो रामानन्द सागर के सफल टेलीविजन धारावाहिक रामायण में सीता के अभिनय के कारण प्रसिद्ध हुई।इसके अतिरिक्त उन्होंने विभिन्न अन्य पौराणिक कथा आधारित धारावाहिकों में अभिनय किया है। उन्होंने राज किरन के साथ फ़िल्म सन मेरी लैला (१९८३) में अभिनय करके फ़िल्मी दुनिया में पदार्पण किया। उन्होंने रुपये दस करोड़ (१९९१), घर का चिराग (१९८९) और खुदाई (१९९४) में राजेश खन्ना के साथ अभिनय किया। उन्होंने एक मलयाली फ़िल्म इतिले इनियम् वरु (१९८६) में मामूट्टी के साथ अभिनय किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने कन्नड़, तमिल और बंगाली फ़िल्मों में भी काम किया।